अयोध्या राम मंदिर: इतिहास, वर्तमान और धर्मध्वज का महत्व.

अयोध्या राम मंदिर और धर्मध्वज का महत्व

इतिहास — राम जन्मभूमि से आधुनिक मंदिर तक

1. प्राचीन और धार्मिक महत्व

हिन्दू धर्म में माना जाता है कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है, जो सूर्यवंशीय राजाओं का केंद्र रहा।

यह स्थान महाकाव्य वाल्मीकि रामायण में भी महत्वपूर्ण है, और यहाँ राम-राज्य की परंपरा जुड़ी है।

2. बाबरी मस्जिद और विवाद

16वीं शताब्दी में बाबर के सेनापति मीर बाक़ी की देखरेख में यहाँ बाबरी मस्जिद बनी थी।

दिसंबर 1992 को विवादित मस्जिद को तोड़ दिया गया था, जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया।

यह मामला लंबे समय तक कानूनी और राजनैतिक लड़ाई में रहा।

3. सुप्रीम कोर्ट का फैसला

9 नवंबर 2019 को भारत की सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन पर राम लल्ला (भगवान राम की मूर्ति) को हक देना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस “कानून का उल्लंघन” था।

इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में alternative 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया।

4. मंदिर निर्माण

मंदिर निर्माण के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनाया गया।

5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर की भूमिपूजन की, यानी नींव रखी।

22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतीष्ठा (मूर्ति में जीवन बोध कराने की विधि) की गई और मंदिर को आधिकारिक रूप से पूजा-योग्य घोषित किया गया।

25 नवम्बर का कार्यक्रम — ध्वजारोहण और महत्व

1. राम मन्दिर ध्वजारोहण (Flag Hoisting / धर्मध्वज)

25 नवंबर 2025 को मंदिर के मुख्य शिखर (spire) पर एक केसरिया (सैफ्रन) धर्मध्वज फहराया गया।

इस ध्वजारोहण समारोह का समय अभिजीत मुहूर्त में चुना गया है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समारोह में प्रमुख भूमिका निभाई।

2. धर्मध्वज का प्रतीकवाद

ध्वज का आकार लगभग 10 फीट ऊँचा × 20 फीट लंबा है।

ध्वज पर तीन प्रमुख प्रतीक हैं: सूर्य (Sun), “ॐ” (Om) और कोविडर (Kovidara) वृक्ष।

सूर्य: राम की सूर्यवंशीय (Suryavansh) शक्ति और उनकी राजपरंपरा का प्रतिनिधित्व करता है।

ॐ: आध्यात्मिकता और सनातन ध्वनि का प्रतीक।

कोविडर वृक्ष: यह एक पौराणिक वृक्ष है, जो मंदर और पारिजात वृक्षों का संकरण माना जाता है।

ध्वज को टिकाऊ मटेरियल (पैरा-शूट ग्रेड कपड़ा) से बनाया गया है ताकि यह तेज हवा, बारिश और धूप सह सके।

3. समारोह का सन्देश

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह ध्वज सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं है, बल्कि भारतीय सभ्यता और धर्म का पुनरागमन दर्शाता है।

ट्रस्ट अधिकारियों और पुरोहितों के अनुसार, ध्वजारोहण मंदिर के भौतिक और आध्यात्मिक पूर्णता (completion) का प्रतीक है अब मंदिर केवल एक निर्माण स्थल नहीं, बल्कि पूरी तरह सक्रिय दिव्य स्थल बन गया है।

यह एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है: रामराज्य का प्रतीक, और धार्मिक-नैतिक मूल्यों की पहचान।

धर्मध्वज (Dharma Dhwaj) का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

यह ध्वज अयोध्या की प्राचीन परंपरा को पुनर्स्थापित करता है — इतिहासकारों और विद्वानों के अनुसार, यह ध्वज प्राचीन रामायण संस्करणों और कुलदर्पणों में उल्लेखित था।

इंडोलॉजिस्ट ललित मिश्रा ने पुरानी पेंटिंग्स और वाल्मीकि रामायण में ध्वज की पहचान की और पुनः स्थापित किया।

यह ध्वज भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक बन गया है  धर्म के प्रतीक, सामाजिक अखंडता, और अद्भुत परंपरा का पुनरुद्धार।

4. निष्कर्ष और भविष्य

अयोध्या राम मंदिर का इतिहास सिर्फ धार्मिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक-राजनैतिक रूप से भी गहन रहा है। विवाद, कानूनी लड़ाइयाँ, और संघर्षों के बाद यह मंदिर अब अपने पूर्ण रूप में स्थापित हो गया है।

ध्वजारोहण ने मंदिर की निर्माण यात्रा को एक नई राह दी है — यह संकेत है कि मंदिर केवल धार्मिक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि भारतीय सभ्यता और धर्म संस्कृति का एक प्रतीक है।

आगे का भविष्य अयोध्या के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा: मंदिर अब तीर्थस्थल के साथ-साथ वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र बन चुका है और यह रामराज्य के आदर्शों को और मजबूत करता है.

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