
दुनिया भर में गैस (LPG, LNG और पेट्रोल-डीजल) की कीमत बढ़ने का मुख्य कारण मध्य-पूर्व में चल रहा संघर्ष, खासकर ईरान-अमेरिका तनाव है। जब युद्ध या तनाव बढ़ता है तो तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं।
गैस और तेल की कीमत क्यों बढ़ रही है
मध्य-पूर्व दुनिया के तेल और गैस का सबसे बड़ा केंद्र है। अभी संघर्ष के कारण कई ऊर्जा परियोजनाएं और सप्लाई रूट प्रभावित हुए हैं। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस का व्यापार होता है। जब यहां जहाजों की आवाजाही कम होती है या खतरा बढ़ता है तो सप्लाई घट जाती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ जाती हैं।
ईरान-अमेरिका युद्ध कब खत्म हो सकता है
अभी इस संघर्ष के जल्दी खत्म होने की कोई निश्चित तारीख नहीं है। कई देश कूटनीतिक बातचीत और युद्धविराम की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर बातचीत सफल होती है तो कुछ हफ्तों या महीनों में तनाव कम हो सकता है, लेकिन अगर हमले जारी रहे तो संघर्ष लंबा चल सकता है।
भारत पर इसका क्या असर पड़ रहा है
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल और बड़ी मात्रा में गैस विदेश से खरीदता है। इसलिए जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ती हैं तो भारत में भी एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और LNG महंगे हो जाते हैं। साथ ही उर्वरक, स्टील, केमिकल और ट्रांसपोर्ट जैसी कई उद्योगों की लागत भी बढ़ जाती है।
भारत की समस्या और सरकार की रणनीति
भारत इस संकट से बचने के लिए कई कदम उठा रहा है, जैसे
अलग-अलग देशों से गैस और तेल खरीदना
रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Reserve) बढ़ाना
LNG आयात बढ़ाना
सौर, पवन और हरित ऊर्जा पर जोर देना
घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने की योजना
इन उपायों से भविष्य में ऊर्जा संकट और महंगाई को कम करने की कोशिश की जा रही है।
दुनिया में गैस और तेल की कीमत बढ़ने का मुख्य कारण मध्य-पूर्व का युद्ध और सप्लाई रुकना है। इसका असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। जब तक युद्ध और तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है लेकिन देखना है अब भारत सरकार की कूटनीति कितनी कारगर साबित होती है जिससे भारत के लोगों को गैस और तेल की किल्लत से राहत दिलाती है।