
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत
2026 के अंत तक, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने एक बड़ी सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान में सशस्त्र कार्रवाई शुरू की। इस हमले का लक्ष्य ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ढांचे को कमजोर करना बताया गया। इसी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि हुई है। ईरानी स्टेट मीडिया और कई अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने कहा कि वह एयर्स्ट्राइक में मारे गए हैं, साथ ही उनके परिवार के सदस्यों में से कुछ के भी मारे जाने की खबरें हैं, और ईरान ने 40 दिनों का शोक घोषित किया है।
2026 की शुरुआत में इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान में सैन्य ठिकानों, स्कूलों और अन्य जगहों पर हमले किए, जिससे सैकड़ों नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें बच्चों की भी संख्या बड़ी थी।
कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई?
अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के सुप्रीम नेता थे, जिन्होंने 1989 से देश का नेतृत्व किया और कड़े सैन्य, सामाजिक और विदेश नीति निर्णय लिए। वे लंबे समय से अमेरिका और इजरायल के समाधान-विरोधी रुख के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कई गृह और बाहरी संघर्षों का सामना किया, जिनमें नागरिक विरोध प्रदर्शन, आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य टकराव शामिल हैं।
खामेनेई की मौत के बाद, ईरान ने अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। मध्य पूर्व के कई देशों में विस्फोट, मिसाइल अलर्ट और तनाव बढ़ा हुआ है। यूएन और कई देशों ने संघर्ष को कम करने की अपील की है, लेकिन दोनों पक्षों के जवाबी हमलों से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ रही है।
क्या इससे विश्व युद्ध का खतरा बढ़ा?
वर्तमान में यह स्पष्ट है कि यह संघर्ष स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर बहुत गंभीर है और मध्य पूर्व को व्यापक रूप से प्रभावित कर रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि:
यह संघर्ष वैश्विक सत्ता संतुलन को प्रभावित कर सकता है क्योंकि अमेरिका और इजरायल भारतीय-सी शक्तियों को लक्षित कर रहे हैं।
तेल और ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था में अस्थिरता आती है।
हालांकि अभी तक तीसरे विश्व युद्ध की स्थिति घोषित नहीं हुई, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। (ज़रूरी नहीं कि विश्व युद्ध शुरू हो गया हो, पर यह तनाव बेहद ऊँचा है और व्यापक संघर्ष का जोखिम बना हुआ है।