थाईलैंड और कंबोडिया का विवाद क्या है?
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच मुख्य विवाद सीमा रेखा और प्रेह विहार (Preah Vihear) मंदिर क्षेत्र को लेकर है। यह विवाद दशकों पुराना है और समय-समय पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़पें होती रहती हैं।

विवाद की मूल समस्या क्या है?
- ऐतिहासिक सीमा नक्शे अलग-अलग हैं
1907 में फ्रांसीसी शासन में कंबोडिया ने एक नक्शा बनाया।
थाईलैंड इस नक्शे को स्वीकार नहीं करता और अपना पुराना नक्शा सही मानता है।
दोनों नक्शों की सीमा अलग-अलग है, इसलिए जमीन को लेकर विवाद बना रहता है।
- Preah Vihear मंदिर का भू-क्षेत्र
यह मंदिर कंबोडिया में है लेकिन पहाड़ी इलाका थाईलैंड की ओर ढलान पर है।
मंदिर के आसपास 4.6 km का क्षेत्र “डिस्प्यूटेड ज़ोन” माना जाता है।
दोनों देश इस क्षेत्र को अपना मानते हैं।
- राष्ट्रीय गर्व और राजनीति
मंदिर दोनों देशों के लिए संस्कृति और गौरव का प्रतीक है।
राजनीतिक पार्टियाँ भी इसे मुद्दा बनाकर तनाव बढ़ाती हैं
विवाद का इतिहास: कब क्या हुआ?
ICJ ने कहा कि
मंदिर कंबोडिया का है,
पर आसपास की भूमि पर साफ फैसला नहीं दिया गया।
यहीं से अस्पष्टता बनी।
2008 — विवाद फिर भड़का
Preah Vihear मंदिर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज बना।
थाईलैंड ने आपत्ति की और सीमा पर सैन्य गतिविधि बढ़ गई।
2011 — सबसे बड़ी सैन्य झड़प
दोनों देशों की सेनाओं में भारी गोलीबारी हुई।
कई सैनिक और नागरिक मारे गए।
2013 — ICJ का दूसरा निर्णय
ICJ ने कहा कि
मंदिर के आसपास का क्षेत्र भी कंबोडिया के प्रशासन में माना जाएगा।
लेकिन थाईलैंड ने फिर भी कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई।
2023–2025 — छोटी-छोटी झड़पें जारी
आज भी समय-समय पर गोलीबारी, गिरफ्तारी और तनाव सामने आता रहता है।
रोज-रोज लड़ाई क्यों होती है? (Current Issues)

- सीमा पर स्पष्ट मार्किंग नहीं है
दोनों देश अलग-अलग नक्शों के अनुसार सीमा मानते हैं।
- सेना का भारी प्रेज़ेंस
सीमा पर दोनों देशों के सैनिक तैनात हैं, जिससे छोटी सी गलती भी तनाव बढ़ा देती है।
- अवैध लकड़ी कटाई, स्मगलिंग और स्थानीय झगड़े
इन मुद्दों के कारण भी सीमा पर टकराव होते हैं।
- राजनीति और राष्ट्रवाद
चुनाव के समय नेता इस मुद्दे को भड़का देते हैं।
समाधान क्या है? (Possible Solutions)
- संयुक्त सीमा मार्किंग (Joint Border Mapping)
दोनों देशों को एक ही नक्शे पर सहमत होना होगा।
इसे ही “डिमार्केशन” कहा जाता है।
- Neutral Zone बनाना
मंदिर के आसपास कुछ km क्षेत्र को
“Peace Zone” बनाया जा सकता है
जहाँ कोई सेना नहीं हो।
- मिलकर पर्यटन विकास
दोनों देश मंदिर क्षेत्र को
संयुक्त पर्यटन/आर्थिक ज़ोन
घोषित कर सकते हैं।
- ASEAN की निगरानी
ASEAN एक शांतिपूर्ण मध्यस्थ की तरह काम कर सकता है।
- लोगों के लिए आसान सीमा-पार यात्रा
स्थानीय लोग आसानी से मंदिर दर्शन के लिए जा सकें, इससे तनाव घटेगा।
थाईलैंड और कबोडिया विवाद का निष्कर्ष
थाईलैंड और कंबोडिया का विवाद ऐतिहासिक नक्शों, सांस्कृतिक महत्व और राजनीतिक हितों का मिश्रण है। इसे शांतिपूर्ण बातचीत, संयुक्त मैपिंग और आर्थिक सहयोग से ही सुलझाया जा सकता है। सही दिशा में कदम उठें तो यह क्षेत्र दुनिया का बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता है।