
प्रयागराज में कल्पवास और माघ स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है। हर वर्ष माघ माह में त्रिवेणी संगम पर माघ मेला लगता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। कल्पवास एक आध्यात्मिक व्रत है, जिसमें श्रद्धालु संगम तट पर रहकर संयमित जीवन जीते हैं, प्रतिदिन गंगा स्नान करते हैं, पूजा-पाठ, ध्यान और दान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि कल्पवास से आत्मशुद्धि होती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
कल्पवास की शुरुआत पौष पूर्णिमा से होती है और माघी पूर्णिमा तक चलती है। सामान्य रूप से कल्पवास की अवधि लगभग एक माह (करीब 30 दिन) मानी जाती है। पौष पूर्णिमा के दिन कल्पवासी संगम तट पर प्रवेश करते हैं और माघी पूर्णिमा के दिन अंतिम स्नान व दान के साथ कल्पवास का समापन करते हैं। हालांकि कुछ श्रद्धालु 3, 5 या 11 दिन का संक्षिप्त कल्पवास भी करते हैं।
प्रयागराज में स्नान की शुरुआत पौष पूर्णिमा से होती है। यही माघ मेले और कल्पवास का पहला और प्रारंभिक स्नान माना जाता है। इसके बाद पूरे माघ माह में विभिन्न शुभ तिथियों पर स्नान किया जाता है, जिनमें मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा प्रमुख हैं। इन दिनों संगम में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है और सबसे अधिक भीड़ इन्हीं तिथियों पर होती है।
पहला स्नान: पौष पूर्णिमा को होता है, इसी दिन से माघ मेला और कल्पवास आरंभ हो जाता है।
अंतिम प्रमुख स्नान: महाशिवरात्रि को माना जाता है, जिसके साथ माघ मेला पूर्ण रूप से समाप्त होता है।
इस प्रकार, प्रयागराज में माघ माह के दौरान पौष पूर्णिमा से स्नान शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलता है, जबकि कल्पवास पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक किया जाता है। यह पूरा काल आध्यात्मिक साधना, आस्था और धार्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है।