
बीजेपी ने दिसंबर 14, 2025 को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया है। नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (National Working President) बने हैं नितिन नाबिन, जो बिहार के वरिष्ठ नेता और मंत्री हैं। यह पद उन्हें पार्टी के आंतरिक संगठनात्मक नेतृत्व के रूप में दिया गया है, और उम्मीद है कि वे जल्द ही पूरा राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) बन सकते हैं।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से एक है और इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष पार्टी के संगठन का सबसे अहम पद होता है। बीजेपी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी पूरे देश में पार्टी संगठन को मजबूत करना, चुनावी रणनीति तय करना, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच समन्वय बनाना और पार्टी की वैचारिक दिशा को आगे बढ़ाना होता है। हाल के वर्षों में जे.पी. नड्डा इस पद पर रहे हैं और उनके नेतृत्व में पार्टी ने लोकसभा, विधानसभा और संगठनात्मक स्तर पर कई बड़े फैसले लिए हैं। समय-समय पर पार्टी अपने संविधान के अनुसार नए अध्यक्ष का चुनाव या कार्यकाल विस्तार करती है।
बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव सीधे आम जनता द्वारा नहीं होता, बल्कि यह एक आंतरिक संगठनात्मक प्रक्रिया है। पार्टी के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए व्यक्ति का लंबे समय से पार्टी का सक्रिय सदस्य होना जरूरी होता है, आमतौर पर कम से कम 10–15 साल का संगठनात्मक अनुभव देखा जाता है। इसके अलावा उम्मीदवार को पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं और संगठन का भरोसा हासिल होना चाहिए। अध्यक्ष का चुनाव पार्टी के “इलेक्टोरल कॉलेज” द्वारा किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय परिषद और राज्य परिषद के सदस्य शामिल होते हैं। हालांकि व्यवहार में कई बार यह चुनाव औपचारिक मतदान की बजाय सर्वसम्मति से किया जाता है, जहां शीर्ष नेतृत्व और संगठन मिलकर एक नाम तय कर देते हैं।
बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले एक अहम शर्त यह होती है कि देश के कम से कम आधे राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो चुके हों। यानी राज्य अध्यक्ष, जिला और मंडल स्तर के चुनाव पहले कराए जाते हैं। इसके बाद राष्ट्रीय परिषद का गठन होता है और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इस पूरी प्रक्रिया को पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण द्वारा संचालित किया जाता है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल सामान्य तौर पर तीन साल का होता है। एक व्यक्ति अधिकतम दो कार्यकाल तक यानी लगभग छह साल तक इस पद पर रह सकता है, हालांकि विशेष परिस्थितियों में पार्टी कार्यकाल बढ़ाने का फैसला भी कर सकती है। अब तक बीजेपी में कई बड़े नेता इस पद पर रह चुके हैं, जिनमें अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, नितिन गडकरी, अमित शाह और जे.पी. नड्डा जैसे नाम शामिल हैं। हर अध्यक्ष के कार्यकाल में पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक शैली में बदलाव देखने को मिला है।
कुल मिलाकर बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना आसान नहीं है। इसके लिए लंबा संगठनात्मक अनुभव, पार्टी के प्रति निष्ठा, नेतृत्व क्षमता और शीर्ष नेतृत्व का विश्वास जरूरी होता है। यही वजह है कि यह पद केवल चुनिंदा और अनुभवी नेताओं को ही मिलता है। बीजेपी की यह प्रक्रिया यह दिखाती है कि पार्टी अपने संगठन को चुनावों से पहले मजबूत करने और नेतृत्व में संतुलन बनाए रखने पर खास जोर देती है।