रुपया क्यों गिर रहा है? और सरकार को क्या होने वाला है फायदे-नुकसान ।

रुपया क्यों गिर रहा है? नुकसान क्या हैं? डॉलर–रुपया का इतिहास और सरकार को होने वाले फायदे-नुकसान

भारत में पिछले कुछ वर्षों से रुपये में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना आम लोगों से लेकर सरकार और उद्योगों तक सभी को प्रभावित करता है। आइए समझते हैं कि रुपया क्यों गिरता है, इसका देश पर क्या असर होता है, और डॉलर–रुपया का पूरा इतिहास क्या कहता है।

रुपया गिरता क्यों है? | Why Indian Rupee Falls

रुपया कई आर्थिक और बाहरी कारणों से कमजोर होता है, जैसे

1. Global Market का प्रेशर

अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने पर foreign investors अपना पैसा भारत से निकालकर अमेरिका में लगा देते हैं।

इससे भारत में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया गिरता है।

2. Import ज़्यादा, Export कम

भारत तेल, सोना, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सामान बड़ी मात्रा में आयात करता है।
जब imports बढ़ते हैं, डॉलर की जरूरत बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।

3. Crude Oil की बढ़ती कीमतें

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत को ज़्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।
इससे रुपये की वैल्यू पर सीधा दबाव पड़ता है।

4. Foreign Investment कम होना

राजनीतिक अस्थिरता, वैश्विक मंदी या युद्ध जैसी स्थितियों में FDI और FPI कम हो जाते हैं।
परिणाम—रुपया गिरने लगता है।

5. Domestic Economy में Slowdown

GDP growth कम होना, महंगाई बढ़ना और व्यापार घाटा बढ़ने से भी रुपये पर नकारात्मक असर पड़ता है।

रुपया गिरने से क्या नुकसान होते हैं?

रुपये के कमजोर होने का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है—

1. महंगाई बढ़ती है

तेल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, कारें आदि महंगे हो जाते हैं।

क्योंकि ये डॉलर में खरीदे जाते हैं।

2. Travel और Foreign Education महंगी

विदेशों में पढ़ाई, टिकट, होटल—सबका खर्च बढ़ जाता है।

3. Import करने वाली कंपनियों को भारी नुकसान

उन्हें ज़्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है, प्रॉफिट कम हो जाता है।

4. सरकार का Import Bill बढ़ जाता है

यानी विदेशी ऋण और बजट पर दबाव बढ़ता है।

रुपया गिरने से क्या फायदे भी होते हैं? | Benefits

कुछ क्षेत्रों को इससे फायदा भी मिलता है—

1. Exporters को फायदा

IT companies

Textile exporters

Pharma exporters
इनका प्रॉफिट बढ़ जाता है क्योंकि वे डॉलर में कमाते हैं।

2. Tourism Industry को फायदा

विदेशियों के लिए भारत सस्ता हो जाता है, टूरिज़्म बढ़ता है।

डॉलर और रुपये का इतिहास | USD–INR History

भारत ने अपना रुपया पहली बार 1540 में शेरशाह सूरी के समय जारी किया था।
लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये की तुलना 1947 के बाद शुरू हुई।

1947 — 1 USD = ₹1

आजादी के समय भारत का विदेशी कर्ज बहुत कम था और डॉलर से रुपये का रेट बराबरी का था।

1950–1960

सरकारी खर्च बढ़ा, प्लानिंग कमीशन की योजनाओं के लिए विदेशी कर्ज बढ़ा।
रुपया धीरे-धीरे कमजोर होने लगा।

1966 — पहला बड़ा अवमूल्यन (Devaluation)

1 USD = ₹7.50

1991 — आर्थिक संकट

भारत के पास केवल 3 हफ्तों का विदेशी भंडार बचा था।
IMF Loan लेना पड़ा।
रुपया 1 USD = ₹25 के करीब पहुंच गया।

2000–2010

ग्लोबलाइजेशन, IT boom और FDI के कारण रुपया मज़बूत रहा।
₹43–₹46 के बीच स्थिर रहा।

2013–2020

तेल की कीमतें बढ़ीं

डॉलर इंडेक्स मजबूत

विदेशी निवेश उतार-चढ़ाव

रुपया ₹60–₹75 के बीच रहा।

2021–2025

COVID के बाद global inflation, Russia-Ukraine war, US interest rate hikes से रुपया और गिरा।
रुपया ऐतिहासिक स्तर तक नीचे गया।

सरकार को क्या फायदा–नुकसान होता है?

सरकार को नुकसान

1. Import Bill बढ़ता है


सरकार को तेल और गैस के लिए ज्यादा डॉलर देने पड़ते हैं।

2. महंगाई पर दबाव


देश में महंगाई बढ़ती है, जिससे सरकार पर जनता का दबाव बढ़ता है।

3. Foreign Debt महंगा होता है


विदेशी कर्ज को चुकाना महंगा पड़ जाता है।

सरकार को फायदे

1. Export बढ़ता है


सरकार की export policy को लाभ मिलता है, export numbers improve होते हैं।

2. Tourism और इनकम बढ़ती है


विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।

रुपये को मजबूत करने के उपाय

विदेशी निवेश बढ़ाना

घरेलू उत्पादन बढ़ाना (Make in India)

गोल्ड इंपोर्ट कम करना

IT और Export सेक्टर को बढ़ावा

ब्याज दर और राजकोषीय नीतियों में सुधार

विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत रखना

निष्कर्ष बताए तो

रुपये का गिरना केवल एक आर्थिक घटना नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई, व्यापार और जनजीवन पर सीधा असर डालने वाली प्रक्रिया है। इसकी वजहें वैश्विक भी हैं और घरेलू भी। जहां एक ओर कुछ सेक्टर इसका फायदा उठाते हैं, वहीं आम जनता और सरकार पर इसका वित्तीय दबाव बढ़ जाता है। मजबूत आर्थिक नीतियां, संतुलित imports और स्थायी foreign investment रुपये को स्थिर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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