
“नीतीश कुमार की जीत का रोडमैप: 10वीं बार सीएम बनने की राह पर, लेकिन क्या सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा फिर से बनेंगे डिप्टी सीएम”
नीतीश कुमार का दसवां कार्यकाल
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने भारी बहुमत हासिल किया। इसकी जीत के साथ, नीतीश कुमार ऐतिहासिक रूप से दसवीं बार मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा हैं।
यह तथ्य न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक ताकत का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उनकी लीडरशिप पर गठबंधन पार्टनर्स का भरोसा बरकरार है।
डिप्टी सीएम: जातीय और राजनीतिक संतुलन की रणनीति
एनडीए की नई सरकार में दो उप मुख्यमंत्री नियुक्त किए गए थे।
सम्रात चौधरी (BJP) — तारापुर से जीते हैं।
विजय कुमार सिन्हा (BJP) — लखीसराय से जीत हासिल की।
दोनों ही नेता पिछली सरकार में डिप्टी सीएम रह चुके हैं और उनका फिर से चुनावी नेतृत्व में शामिल होना गठबंधन की जातीय और क्षेत्रीय रणनीति को मजबूत कर सकता है।
वोटिंग हासिल और जनादेश की स्पष्टता
सम्रात चौधरी ने तारापुर सीट पर लगभग 45,843 वोटों से जीत हासिल की।
विजय कुमार सिन्हा ने लखीसराय से लगभग 24,940 वोटों की बढ़त बनाई।
इन जीतों ने यह दिखाया कि उनके पास जनता में मजबूत लोकप्रियता है और उन्हें विधानसभा में एक भरोसेमंद नेतृत्व माना जा रहा है।
एनडीए की स्थिर सरकार की संभावना
एनडीए ने बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें जीतीं, जिससे एक मजबूत और स्थिर नेतृत्व की उम्मीद बन रही है।
इससे यह संकेत मिलता है कि नई सरकार विकास, सुशासन और गठबंधन संतुलन को बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
चुनौती और अवसर
चुनौती: जबकि मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम लीडरशिप मजबूत है, उन्हें जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना होगा — जैसे कि रोजगार, बुनियादी ढांचा और शिक्षा के मुद्दे।
अवसर: इस बार तीन उप मुख्यमंत्रियों शपथ लेने की उम्मीद जताई जा रही है कि विभिन्न सामाजिक समूहों (जाति और क्षेत्र) को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे सरकार को व्यापक समर्थन मिल सकता है।
निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 ने दिखाया कि एनडीए ने न सिर्फ चुनावी जीत हासिल की है, बल्कि उन्होंने राजनीतिक संतुलन बनाने की स्मार्ट रणनीति भी अपनाई है।
नीतीश कुमार की नेतृत्व क्षमता और स्थिरता अब दशकों से परखी जा चुकी है।
सम्रात चौधरी और विजय कुमार सिन्हा जैसे डिप्टी सीएम और तीसरे डिप्टी सीएम चिराग पासवान भी हो सकते है जिस तरह से गठबंधन के सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करते हैं, वह सरकार को और अधिक मजबूत बनाएगा।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नेतृत्व जनता के आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर कैसे काम करता है — और क्या यह बिहार के विकास की दिशा में एक नई गति ला सकता है।