भारत की जनगणना कब से होगी शुरू।

भारत की जनगणना

जनगणना किसी भी देश के लिए बहुत जरूरी प्रक्रिया होती है, क्योंकि इसके जरिए सरकार को यह पता चलता है कि देश में कितने लोग रहते हैं, उनकी उम्र क्या है, वे कहां रहते हैं, क्या काम करते हैं, उनकी शिक्षा, रहन-सहन, घर की स्थिति, सुविधाएं और सामाजिक-आर्थिक हालात कैसे हैं। भारत में जनगणना हर 10 साल में एक बार कराई जाती है और यह संविधान के तहत एक आधिकारिक प्रक्रिया है। भारत की आखिरी जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी, जबकि अगली जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टाल दिया गया। महामारी के दौरान घर-घर जाकर आंकड़े इकट्ठा करना जोखिम भरा था, इसलिए सरकार ने इसे स्थगित कर दिया और अब इसे 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 में कराने की तैयारी की जा रही है।

जनगणना से सरकार को कई बड़े फायदे होते हैं। इसके आंकड़ों के आधार पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, सड़क, पानी, बिजली, आवास और रोजगार से जुड़ी योजनाएं बनाई जाती हैं। किस इलाके में कितने लोगों को राशन चाहिए, कहां ज्यादा अस्पताल या डॉक्टरों की जरूरत है, किस राज्य या जिले को ज्यादा बजट देना है, यह सब जनगणना के डेटा से तय होता है। इसके अलावा चुनावी क्षेत्रों का परिसीमन, यानी लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाएं भी जनगणना के आधार पर तय होती हैं। अगर जनगणना समय पर न हो, तो सरकार को पुराने और गलत आंकड़ों पर योजनाएं बनानी पड़ती हैं, जिससे कई लोगों तक सही लाभ नहीं पहुंच पाता।

आने वाली जनगणना इसलिए भी अलग और खास होगी, क्योंकि यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। इसमें कागज की जगह मोबाइल ऐप, टैबलेट और ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। कई लोग खुद भी ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे, जिसे सेल्फ एन्यूमरेशन कहा जाता है। इससे डेटा तेजी से इकट्ठा होगा, गलतियों की संभावना कम होगी और नतीजे जल्दी सामने आएंगे। सरकार डेटा की सुरक्षा के लिए खास तकनीकी सिस्टम भी तैयार कर रही है, ताकि लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रहे।

इस डिजिटल जनगणना के लिए केंद्र सरकार ने करीब 11,700 से 12,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। लाखों सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारी इसमें लगाए जाएंगे, जिन्हें पहले ट्रेनिंग दी जाएगी। सरकार का प्लान है कि पहले चरण में घरों की सूची बनाई जाए और दूसरे चरण में लोगों की गिनती और व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जाए। कुल मिलाकर जनगणना देश की विकास योजना की रीढ़ है। बिना सही जनसंख्या डेटा के न तो सही नीतियां बन सकती हैं और न ही विकास का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकता है, इसलिए जनगणना होना बेहद जरूरी है।

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