बांग्लादेश में मौत का तांडव ।

क्यों जल रहा है बांग्लादेश

बांग्लादेश में जब से शेख हसीना सत्ता से बेदखल हुई है तब से बांग्लादेश में चरमपंथी हिंसा, उग्रवाद और आपसी टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं, उसने पूरे देश को अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। यह सिर्फ सरकार बनाम किसी एक संगठन की लड़ाई नहीं है, बल्कि अलग-अलग कट्टरपंथी गुटों, आतंकवादी नेटवर्क, और अवैध घुसपैठ से जुड़े समूहों के बीच सत्ता, प्रभाव और वर्चस्व की जंग है। इसी टकराव में आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंच रहा है।
बांग्लादेश की राजनीति और समाज में चरमपंथ की जड़ें काफी पुरानी हैं। आजादी के बाद से ही धर्म आधारित राजनीति, सैन्य शासन, और कमजोर संस्थानों ने कट्टर सोच को पनपने का मौका दिया। कुछ संगठनों ने धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर युवाओं को भड़काया, वहीं कुछ समूह बाहरी आतंकवादी नेटवर्क से प्रेरित या उनसे जुड़े बताए जाते हैं। इनका मकसद लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करना, डर का माहौल बनाना और अपने कट्टर एजेंडे को थोपना है।
घुसपैठ की समस्या ने हालात को और गंभीर बना दिया है। सीमा पार से आने वाले कुछ कट्टरपंथी तत्व हथियार, फंडिंग और ट्रेनिंग के साथ देश में घुसते हैं। ये लोग स्थानीय नेटवर्क से जुड़कर हिंसक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। कई बार ये गुट आपस में ही भिड़ जाते हैं, क्योंकि हर संगठन ज्यादा ताकत और नियंत्रण चाहता है। इसी वजह से बांग्लादेश में कई घटनाओं में देखा गया है कि उग्रवादी गुट एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं, जिससे अराजकता और बढ़ जाती है।
इन चरमपंथी और आतंकवादी समूहों का बड़ा लक्ष्य बांग्लादेश को अस्थिर करना है। वे चाहते हैं कि सरकार कमजोर पड़े, अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब हो। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे बाहरी ताकतों के हित भी हो सकते हैं, जो क्षेत्रीय अस्थिरता से फायदा उठाना चाहते हैं। हालांकि सरकार लगातार सुरक्षा एजेंसियों के जरिए कार्रवाई कर रही है, लेकिन नेटवर्क का फैलाव और कट्टर विचारधारा का असर पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है।
बांग्लादेश में चरमपंथ की यह कहानी सिर्फ हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक लड़ाई भी है। जब तक शिक्षा, रोजगार, सामाजिक समानता और मजबूत कानून व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक कट्टरपंथी संगठनों को नए समर्थक मिलते रहेंगे। आज बांग्लादेश जिस दौर से गुजर रहा है, वह चेतावनी है कि अगर समय रहते चरमपंथ, आतंकवाद और घुसपैठ पर सख्ती से काबू नहीं पाया गया, तो इसका असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और शांति पर पड़ेगा।

Leave a Comment