इंदौर में दूषित पानी पीने से 10 बच्चों की मौत।

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हुआ, जिसमें कई लोगों की जान चली गई और सैकड़ों बीमार पड़े। जांच में सामने आया कि पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिल गया था, जिससे डायरिया, उल्टी और संक्रमण फैला। इस घटना के लिए नगर निगम और जल आपूर्ति व्यवस्था की लापरवाही को जिम्मेदार माना जा रहा है।

राज्य सरकार ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की, कुछ को हटाया गया और जांच के आदेश दिए गए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ितों के इलाज व मुआवजे की घोषणा की। वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि व्यवस्था में चूक हुई है और कहा कि किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

लेकिन सवाल है कि इस मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा गरीबों को साफ पानी मुहैया करने की जिम्मेदारी किसकी है सिर्फ अधिकारियों को बर्खास्त कर देना काफी है

इस मामले में NHRC ने भी राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है, जिससे जवाबदेही तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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