सकट चौथ क्या है? सकट चौथ की कथा, पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं

सकट चौथ क्या होती है?

सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ और माघी चौथ भी कहा जाता है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और संकटों से रक्षा के लिए रखती हैं। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व होता है।

सकट चौथ का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में सकट चौथ को बहुत ही पुण्यदायी व्रत माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार—
इस दिन गणेश जी की पूजा करने से सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं
संतान के जीवन से कष्ट, रोग और भय समाप्त होते हैं
परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है
यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख से जुड़ा हुआ माना जाता है
सकट चौथ का व्रत चंद्रमा के दर्शन के बाद ही खोला जाता है।

सकट चौथ की पूजा विधि

सकट चौथ की पूजा बहुत श्रद्धा और नियमों के साथ की जाती है
प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें
पूरे दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखा जाता है
शाम को स्वच्छ स्थान पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
गणेश जी को दूर्वा, तिल, गुड़, लड्डू और मोदक अर्पित करें
सकट चौथ की कथा सुनें या पढ़ें
रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें

सकट चौथ की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार—
एक समय की बात है, एक नगर में एक ब्राह्मण रहता था जिसकी संतान नहीं थी। उसकी पत्नी ने पुत्र प्राप्ति के लिए सच्चे मन से सकट चौथ का व्रत किया। भगवान गणेश उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
लेकिन एक बार भूलवश वह सकट चौथ का व्रत नहीं कर पाई, जिससे उसका पुत्र गंभीर संकट में पड़ गया। तब माता ने पुनः श्रद्धा से व्रत रखा और गणेश जी की कृपा से पुत्र का जीवन बच गया। तभी से यह मान्यता है कि सकट चौथ का व्रत संतान को संकटों से बचाता है।

सकट चौथ पर चंद्रमा का महत्व

सकट चौथ का व्रत चंद्र दर्शन के बिना अधूरा माना जाता है। मान्यता है कि—
चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है
व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है
जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं

सकट चौथ से जुड़ी मान्यताएं

यह व्रत मातृत्व और संतान रक्षा का प्रतीक है
गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है
तिल और गुड़ का दान करने से पापों का नाश होता है
सकट चौथ का व्रत करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है

सकट चौथ न केवल एक व्रत है, बल्कि यह मां और संतान के अटूट प्रेम, आस्था और विश्वास का प्रतीक है। हिंदू धर्म में यह पर्व गणेश जी की कृपा पाने और संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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