
यह पूरा मामला हाल के दिनों में राजनीतिक और जांच एजेंसियों से जुड़ी चर्चाओं के कारण सुर्खियों में रहा है। ED ने कोयला घोटाले को लेके रेड कि जिसमें I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) से जुड़े कुछ इनपुट्स और डिजिटल डेटा को लेकर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने जांच के दौरान कई अहम जानकारियों का दावा किया है। इसी क्रम में कुछ आईडी, चैट या डिजिटल एक्सेस से जुड़ी बातें सामने आने की चर्चा हुई, जिसे जांच एजेंसी संदिग्ध मान रही है। विपक्ष का आरोप है कि यह सारी कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की जा रही है, जबकि एजेंसियों का कहना है कि जांच पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही है।
मामले में ममता बनर्जी के परिवार से जुड़े एक iPad या डिजिटल डिवाइस का नाम भी सामने आने की बातें कही गईं, हालांकि इस पर कोई अंतिम या न्यायिक रूप से सिद्ध निष्कर्ष सामने नहीं आया है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि निजी डिवाइस और पारिवारिक सदस्यों को जांच से जोड़कर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है। वहीं ईडी का पक्ष यह है कि जांच के दौरान जो भी डिजिटल सबूत या लिंक सामने आते हैं, उनकी पड़ताल करना उनकी जिम्मेदारी है।
इसी मुद्दे को लेकर ईडी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच तीखी बयानबाज़ी भी देखने को मिली। ममता बनर्जी ने खुलकर आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है और विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश हो रही है। दूसरी ओर, ईडी और केंद्र का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और जांच को राजनीति से जोड़ना गलत है। कुल मिलाकर यह पूरा मामला जांच, राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप के बीच फंसा हुआ है, जिस पर अंतिम तस्वीर जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगी।