आज मनाई जा रही मोहिनी एकादशी: व्रत से मिलेगा पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

मोहिनी एकादशी महत्व

मोहिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रतों में से एक मानी जाती है, जो हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह व्रत आज 27 अप्रैल को श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार धारण किया था, इसलिए इसे “मोहिनी एकादशी” कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि एवं शांति प्राप्त होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने जीवन में मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं।


इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं। पूरे दिन उपवास रखकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य किया जाता है। अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि मोहिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन की सभी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है और सकारात्मकता का संचार होता है। धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत को अत्यंत पुण्यदायक बताया गया है, जिससे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।


मोहिनी एकादशी का व्रत रखने के पीछे मुख्य कारण आत्मशुद्धि और मन की एकाग्रता को बढ़ाना है। आज के समय में जब जीवन तनाव और भागदौड़ से भरा हुआ है, ऐसे में यह व्रत व्यक्ति को मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। इसलिए श्रद्धालु पूरे विधि-विधान के साथ इस व्रत को करते हैं और भगवान विष्णु से सुख-समृद्धि एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

मोहिनी एकादशी कथा

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मोहिनी एकादशी का महत्व भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ा है। त्रेतायुग में सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नामक नगरी में धृष्टबुद्धि नाम का एक राजा रहता था। उसका पुत्र द्युतिमान बुरे कर्मों और पापों में लिप्त था। उसके गलत कार्यों के कारण राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया। भटकते हुए वह जंगल में गया, जहां उसे ऋषि कौंडिन्य मिले। ऋषि ने उसे मोहिनी एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। द्युतिमान ने श्रद्धा से व्रत किया, जिससे उसके सभी पाप नष्ट हो गए और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि यह व्रत जीवन के बड़े से बड़े पापों को भी समाप्त करने की शक्ति रखता है।

मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है—


ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥


इन मंत्रों का नियमित जाप करने से मन को शांति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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