
झारखंड में JPSC-JSSC विवाद
रांची: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितता, पेपर लीक, रिजल्ट और मूल्यांकन में पारदर्शिता की कमी तथा लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। वहीं, सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के कई दौर के बावजूद प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है।
क्या है पूरा विवाद?
छात्रों का आरोप है कि 14वीं JPSC सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट, मेरिट लिस्ट और कटऑफ निर्धारण में पारदर्शिता नहीं बरती गई। अभ्यर्थियों की ओर से OMR शीट और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसी के साथ JSSC CGL 2024 समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं।
विवाद का एक बड़ा मुद्दा परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी को लेकर भी है। छात्रों का दावा है कि TDPL, लखनऊ को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दी गई, जबकि कंपनी को लेकर पहले ब्लैकलिस्ट किए जाने का सवाल उठाया गया है। यही मुद्दा छात्रों के आक्रोश की प्रमुख वजहों में शामिल है।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग क्या है?
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांगों में विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और JSSC CGL 2024 समेत संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग शामिल है। छात्र पूरे मामले की जांच CBI से कराने पर भी जोर दे रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि सिर्फ किसी एक परीक्षा का रिजल्ट या प्रक्रिया सुधारना पर्याप्त नहीं है। भर्ती परीक्षाओं में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे भविष्य में पेपर लीक, अनियमितता और परिणामों को लेकर सवाल खड़े न हों।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की गई है। सरकार का कहना है कि छात्रों की बड़ी संख्या में मांगों को स्वीकार किया जा चुका है और करीब 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति बन गई है। हालांकि, जांच एजेंसी और कुछ प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध कायम है।
सरकार की ओर से CID जांच का प्रस्ताव रखा गया है, जबकि आंदोलनकारी छात्र CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। यही अंतर बातचीत को अंतिम सहमति तक पहुंचने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक माना जा रहा है।
क्यों नहीं बन रही सहमति?
पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल जांच एजेंसी पर भरोसे का है। छात्र CID जांच को पर्याप्त नहीं मानते और मामले की जांच CBI से कराने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर सरकार राज्य स्तर पर जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के पक्ष में दिखाई दे रही है।
इसके अलावा, छात्रों और सरकार के बीच मांगों की व्याख्या को लेकर भी अंतर है। सरकार जहां बड़ी संख्या में मांगें स्वीकार किए जाने की बात कह रही है, वहीं छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक परीक्षा रद्द करने और CBI जांच जैसी मूल मांगों पर फैसला नहीं होता, आंदोलन समाप्त नहीं किया जा सकता।
उम्र सीमा भी बनी बड़ी चिंता
लंबे समय तक भर्ती परीक्षाओं के लंबित रहने का सीधा असर अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया वर्षों तक खिंच जाती है। इस दौरान कई उम्मीदवारों की उम्र निर्धारित सीमा के करीब पहुंच जाती है या वे आयु सीमा पार कर जाते हैं।
यही वजह है कि छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ किसी एक परीक्षा के रिजल्ट तक सीमित नहीं रह गया है। अभ्यर्थी पूरी भर्ती व्यवस्था में समयबद्धता, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
तीसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा
सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के कई दौर के बावजूद जब प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बनी तो गतिरोध और बढ़ गया। तीसरे दौर की वार्ता विफल रहने के बाद छात्रों ने आंदोलन जारी रखने और विधानसभा घेराव की चेतावनी दी है।
ऐसे में झारखंड में छात्र आंदोलन अब केवल परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और सरकार की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
झारखंड में JPSC-JSSC विवाद का असल केंद्र परीक्षा रद्द करने और जांच एजेंसी को लेकर बना गतिरोध है। सरकार जहां CID जांच और अधिकांश मांगों पर सहमति की बात कर रही है, वहीं छात्र CBI जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग पर कायम हैं। जब तक दोनों पक्ष इन मूल मुद्दों पर एक साझा रास्ता नहीं निकालते, तब तक छात्र आंदोलन के शांत होने के आसार कम दिखाई दे रहे हैं।