
मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन को और मजबूत करने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मीरा-भाईंदर से वसई-विरार को जोड़ने वाली मेट्रो लाइन-13 परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। करीब ₹17,724.99 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना की कुल लंबाई 25.03 किलोमीटर होगी। सरकार ने परियोजना को मंजूरी के बाद पांच साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
मीरा-भाईंदर से वसई-विरार तक आसान होगा सफर
मेट्रो-13 के शुरू होने के बाद मीरा रोड और भाईंदर से वसई, नालासोपारा, नायगांव और विरार तक यात्रा करना आसान हो जाएगा। यह कॉरिडोर पश्चिमी उपनगरों में सड़क और लोकल ट्रेन पर बढ़ते दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
परियोजना का क्रियान्वयन मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) द्वारा किया जाएगा।
25.03 किमी लंबा होगा मेट्रो कॉरिडोर
मेट्रो-13 की कुल लंबाई 25.03 किलोमीटर होगी। इसमें:
21.78 किमी एलिवेटेड मेट्रो लाइन
3.25 किमी भूमिगत मेट्रो लाइन
कुल 16 स्टेशन
इनमें 13 एलिवेटेड और 3 भूमिगत स्टेशन होंगे
यह परियोजना घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के साथ-साथ यात्रियों के आवागमन को तेज करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
नालासोपारा, नायगांव और विरार रेलवे स्टेशन से जुड़ेगी मेट्रो
मेट्रो-13 की सबसे बड़ी खासियत इसका मौजूदा रेल नेटवर्क के साथ इंटीग्रेशन होगा। इस कॉरिडोर को नायगांव, नालासोपारा और विरार रेलवे स्टेशनों से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा मेट्रो लाइन-9 के साथ भी कनेक्टिविटी प्रस्तावित है।
इससे यात्रियों को लोकल ट्रेन और मेट्रो के बीच आसानी से आवागमन करने का विकल्प मिलेगा। मेट्रो-9 के जरिए आगे मुंबई के दूसरे हिस्सों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
वसई क्रीक पर बनेगा बड़ा ब्रिज
परियोजना में वसई क्रीक पर 4.92 किलोमीटर लंबा संयुक्त छह-लेन रोड और मेट्रो ब्रिज भी प्रस्तावित है। यह ब्रिज पांजू आइलैंड को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
इसके अलावा चिखल डोंगरी में मेट्रो डिपो विकसित किया जाएगा। यात्रियों की अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए सभी स्टेशनों पर बस सेवा उपलब्ध कराने की भी योजना है।
रोजाना 4.49 लाख यात्रियों को मिल सकता है फायदा
सरकार के अनुमान के मुताबिक वर्ष 2031 तक मेट्रो-13 से रोजाना करीब 4.49 लाख यात्रियों के सफर करने की उम्मीद है।
परियोजना से सड़क मार्ग की तुलना में यात्रा समय में करीब 50 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही निजी वाहनों पर निर्भरता, प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक और प्रदूषण को कम करने में भी मेट्रो मददगार हो सकती है।
जमीन अधिग्रहण और सड़क का काम छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में परियोजना को मंजूरी दी गई। अधिकारियों को भूमि अधिग्रहण और एप्रोच रोड का काम अगले छह महीने में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद परियोजना के निर्माण कार्य को गति देने की तैयारी है।
वसई-विरार के रियल एस्टेट को भी मिल सकता है फायदा
मेट्रो-13 का असर सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। मीरा-भाईंदर, वसई, नालासोपारा और विरार जैसे इलाकों में बेहतर सार्वजनिक परिवहन से रियल एस्टेट और कमर्शियल गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
जिन इलाकों में अभी सड़क या लोकल ट्रेन पर निर्भरता अधिक है, वहां मेट्रो कनेक्टिविटी शुरू होने के बाद आवासीय परियोजनाओं की मांग और रोजगार केंद्रों तक पहुंच बेहतर होने की संभावना है।
मीरा-भाईंदर से वसई-विरार तक प्रस्तावित मेट्रो लाइन-13 मुंबई के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साबित हो सकती है। ₹17,725 करोड़ के करीब लागत, 25.03 किमी लंबा कॉरिडोर, 16 स्टेशन और मौजूदा रेलवे व मेट्रो नेटवर्क से कनेक्टिविटी के कारण यह परियोजना लाखों यात्रियों के दैनिक सफर को आसान बनाने की क्षमता रखती है। सरकार ने इसे पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।