
Jhansi Akash Pandey Case
झांसी, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के झांसी से सामने आया आकाश पांडेय का मामला न्याय व्यवस्था में देरी और लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाई की गंभीर तस्वीर पेश करता है। करीब 7 साल तक चले मामले में आकाश पांडेय और उनके ममेरे भाई अंकित मिश्रा को अदालत से बड़ी राहत मिली है। दोनों को लगाए गए गंभीर आरोपों से बरी कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में POCSO एक्ट और SC/ST एक्ट समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई हुई थी।
क्या है पूरा मामला?
मामला 8 जून 2018 का बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, झांसी में मातादीन अहिरवार की बेटी का शव फांसी के फंदे से लटका हुआ मिला था। इसके बाद आकाश पांडेय और उनके ममेरे भाई अंकित मिश्रा के खिलाफ छेड़छाड़, आत्महत्या के लिए उकसाने, SC/ST एक्ट और POCSO एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया गया था।
पुलिस की जांच के दौरान आकाश के भाई सचिन को मामले में निर्दोष पाया गया, जबकि आकाश पांडेय और अंकित मिश्रा को जेल भेजा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, आकाश को तीन साल से अधिक समय जेल में बिताना पड़ा, जबकि अंकित करीब एक साल बाद जमानत पर बाहर आ गए थे।
तीन साल से ज्यादा जेल में रहे आकाश
आकाश पांडेय के लिए यह कानूनी लड़ाई बेहद लंबी और कठिन रही। रिपोर्ट के मुताबिक, वह तीन साल से अधिक समय तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहे। इस दौरान उनकी पढ़ाई और करियर प्रभावित हुआ। उनकी आर्थिक स्थिति पर भी इसका असर पड़ा।
सबसे दर्दनाक बात यह रही कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान आकाश के माता-पिता दोनों की मौत हो गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि बेटे के जेल जाने के बाद परिवार को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
कोर्ट में क्या सामने आया?
रिपोर्ट के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आकाश पांडेय और अंकित मिश्रा को आरोपों से बरी कर दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अदालत के सामने यह बात आई कि युवती की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी और इस संबंध में उसके परिवार के सदस्यों की भूमिका सामने आई।
अदालत के आदेश के बाद आकाश और अंकित को राहत मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष न्यायाधीश ने शिकायतकर्ता मातादीन अहिरवार के खिलाफ झूठे साक्ष्य पेश करने और मुकदमा दर्ज कराने को लेकर कार्रवाई का आदेश भी दिया। साथ ही, युवती की मौत के बाद परिवार को मिले मुआवजे की वसूली का भी निर्देश दिए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
बरी होने के बाद भी खत्म नहीं हुई मुश्किलें
अदालत से बरी होने के बाद आकाश जेल से बाहर तो आ गए, लेकिन करीब सात साल की कानूनी लड़ाई ने उनकी जिंदगी पर गहरा असर छोड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी पढ़ाई बीच में छूट गई, खेत बेचने पड़े और जमा पूंजी भी खत्म हो गई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आकाश अब करीब 6 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी कर रहे हैं। वहीं उनके ममेरे भाई अंकित की पढ़ाई और नौकरी पर भी इस मामले का असर पड़ा। वह डिफेंस की तैयारी कर रहे थे, लेकिन मामला लंबा चलने के कारण उनका करियर भी प्रभावित हुआ।
न्याय मिला, लेकिन बीते साल कौन लौटाएगा?
आकाश पांडेय का मामला सिर्फ एक व्यक्ति के बरी होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि अगर किसी व्यक्ति को वर्षों तक मुकदमे का सामना करना पड़े और बाद में वह अदालत से बरी हो जाए, तो जेल में बीता समय, छूटी हुई पढ़ाई, खत्म हुई बचत और परिवार को हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी।
अदालत से राहत मिलने के बावजूद आकाश के जीवन के वे साल वापस नहीं आ सकते, जो मुकदमे और जेल में बीते। इसी वजह से यह मामला त्वरित न्याय और झूठे आरोपों से होने वाले नुकसान को लेकर भी चर्चा में है।
मामले की मुख्य बातें
स्थान: झांसी, उत्तर प्रदेश
घटना: 8 जून 2018
आरोपी: आकाश पांडेय और अंकित मिश्रा
मामले में लगाए गए आरोप: POCSO एक्ट, SC/ST एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराएं
आकाश की जेल अवधि: 3 साल से अधिक, रिपोर्ट के अनुसार
कानूनी लड़ाई: करीब 7 साल
अदालत का फैसला: आकाश पांडेय और अंकित मिश्रा को आरोपों से बरी किया गया
परिवार पर असर: मुकदमे के दौरान आकाश के माता-पिता की मृत्यु
आर्थिक असर: पढ़ाई छूटी, संपत्ति/बचत पर असर और करियर प्रभावित
शिकायतकर्ता के खिलाफ: झूठे साक्ष्य और मुकदमे को लेकर कार्रवाई के आदेश की रिपोर्ट
मुआवजा: पहले मिला मुआवजा वापस वसूलने के निर्देश की रिपोर्ट में जानकारी
झांसी का आकाश पांडेय मामला एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए फैसले की कहानी है। अदालत से बरी होने के बाद आकाश और अंकित को राहत जरूर मिली, लेकिन उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण साल इस मुकदमे में गुजर गए। आकाश ने तीन साल से ज्यादा समय जेल में बिताया और इसी दौरान उनके माता-पिता की भी मृत्यु हो गई। ऐसे मामलों में अंतिम फैसला आने के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि न्याय मिलने में हुई देरी से हुए व्यक्तिगत और आर्थिक नुकसान की भरपाई किस तरह हो सकती है।