
भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: धार परिसर को मंदिर मानते हुए नमाज व्यवस्था रद्द
मध्य प्रदेश के Dhar स्थित विवादित Bhojshala / कमाल मौला परिसर मामले में Madhya Pradesh High Court ने बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को देवी सरस्वती से जुड़ा मंदिर परिसर माना है। अदालत ने 2003 से लागू उस व्यवस्था को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी।
हिंदू पक्ष लंबे समय से भोजशाला को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र बताता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता आया है। इसी धार्मिक और ऐतिहासिक दावे को लेकर वर्षों से न्यायालयों में विवाद चल रहा था।
क्या था मामला?
विवाद की कानूनी पृष्ठभूमि 7 अप्रैल 2003 की उस एएसआई व्यवस्था से जुड़ी है, जिसमें पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग दिन तय किए गए थे। बाद में हिंदू पक्ष ने 2022 में इस व्यवस्था को चुनौती दी। इसके बाद 2024 में हाई कोर्ट ने एएसआई सर्वे कराने का आदेश दिया, जिसकी रिपोर्ट को फैसले में अहम माना गया।
कोर्ट में कौन-कौन पक्षकार रहे?
हिंदू पक्ष की ओर से जितेंद्र सिंह विशेन समेत कई याचिकाकर्ता शामिल रहे, जबकि मुस्लिम पक्ष ने एएसआई सर्वे और रिपोर्ट को पक्षपाती बताया। मामले में Archaeological Survey of India, हाई कोर्ट और बाद में Supreme Court of India की प्रक्रियाएं भी जुड़ीं।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट ने पहले हाई कोर्ट की प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप से इनकार किया था और कहा था कि आपत्तियों पर सुनवाई हाई कोर्ट में ही होगी। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है, ताकि मुस्लिम पक्ष की संभावित अपील पर बिना उनकी सुनवाई के कोई आदेश पारित न हो।
हाई कोर्ट का ताज़ा फैसला
15 मई 2026 को आए फैसले में अदालत ने परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना। कोर्ट ने शुक्रवार की नमाज वाली 2003 की व्यवस्था को समाप्त करते हुए मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन के लिए सरकार से संपर्क करने की सलाह दी। फैसले के बाद हिंदू संगठनों ने खुशी जताई, जबकि मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने के संकेत दिए हैं।
भोजशाला विवाद टाइमलाइन
11वीं सदी: परिसर के मूल स्वरूप को लेकर ऐतिहासिक दावे शुरू।
7 अप्रैल 2003: एएसआई व्यवस्था लागू — मंगलवार पूजा, शुक्रवार नमाज की अनुमति।
मई 2022: हिंदू पक्ष ने 2003 व्यवस्था को अदालत में चुनौती दी।
मार्च 2024: हाई कोर्ट ने एएसआई सर्वे का आदेश दिया।
मई 2026: हाई कोर्ट ने परिसर को मंदिर माना और नमाज व्यवस्था रद्द की।