
राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला 2026
अयोध्या से बड़ी खबर
अयोध्या स्थित भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को लेकर इन दिनों कथित चढ़ावा गबन का मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और सपा विधायक पवन पांडेय ने मंदिर के दानपात्र से करोड़ों रुपये गायब होने के आरोप लगाए हैं। हालांकि राम मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए किसी भी वित्तीय अनियमितता से इनकार किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। फिलहाल चोरी या गबन की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला?
जून 2026 में पहली बार आरोप सामने आया कि राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे की राशि में लगभग 7 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया है। विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे का हिसाब स्पष्ट नहीं है।
सपा विधायक पवन पांडेय ने दावा किया कि 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की राशि गायब हो सकती है। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि नियमित ऑडिट प्रक्रिया जारी है और अब तक किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है।
SIT जांच में क्या सामने आया?
जांच के दौरान पुलिस और विशेष जांच टीम ने मंदिर में चढ़ावे की गणना से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की है।
लवकुश मिश्रा हिरासत में
जांच एजेंसियों ने रुदौली क्षेत्र के मीनापुर फगौली गांव निवासी 27 वर्षीय लवकुश मिश्रा को हिरासत में लिया है। वह मंदिर में चढ़ावे की राशि गिनने के कार्य से जुड़ा हुआ था।
सूत्रों के अनुसार उसके घर से लगभग 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। हालांकि यह राशि कथित गबन से जुड़ी है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। लवकुश मिश्रा से SOG और SIT द्वारा लगातार पूछताछ की जा रही है।
जांच कहां तक पहुंची?
SIT कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच कर रही है:
- मंदिर परिसर और चढ़ावा गणना केंद्र के CCTV फुटेज की जांच।
- नकदी और बैंक रिकॉर्ड का मिलान।
- चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल।
- ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा।
- भविष्य में ऐसी संभावित अनियमितताओं को रोकने के उपायों का अध्ययन।
सरकार ने SIT को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
ट्रस्ट और सरकार का क्या कहना है?
राम मंदिर ट्रस्ट ने साफ कहा है कि मंदिर के वित्तीय लेनदेन पूरी तरह पारदर्शी हैं और नियमित ऑडिट के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए SIT जांच शुरू कर दी है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
क्या सचमुच हुई है चोरी?
अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार राम मंदिर में चोरी या गबन की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल केवल आरोप लगाए गए हैं और जांच जारी है।
मुख्य तथ्य:
- 7 करोड़ रुपये गायब होने का दावा विपक्ष द्वारा किया गया है।
- मंदिर ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज किया है।
- एक कर्मचारी लवकुश मिश्रा हिरासत में है।
- उसके घर से लगभग 10 लाख रुपये मिलने की बात सामने आई है।
- SIT जांच जारी है।
- अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई स्पष्ट होगी।
राम मंदिर चढ़ावा मामले ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर विपक्ष करोड़ों रुपये के गबन का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर मंदिर ट्रस्ट इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रहा है। फिलहाल जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सभी की नजरें अब SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।