
शिवसेना (UBT) अपना वजूद बचाने के लिए जद्दोजहद
नई दिल्ली/मुंबई | 17 जून 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों ने कथित तौर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर संसद में अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये सांसद जल्द ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जाने की तैयारी में हैं।
कौन हैं बागी सांसद?
रिपोर्ट्स के अनुसार जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उनमें:
- संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम)
- संजय दिना पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट)
- संजय जाधव (परभणी)
- नागेश अष्टिकर (हिंगोली)
- भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी)
- ओमराजे निंबालकर (धाराशिव)
शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक पुष्टि सभी नामों की नहीं हुई है।
क्या है “Operation Tiger 2.0”?
सूत्रों के मुताबिक एकनाथ शिंदे खेमे द्वारा लंबे समय से चलाया जा रहा “Operation Tiger” अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में कई गोपनीय बैठकों के बाद बागी सांसदों ने अलग गुट बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
उद्धव ठाकरे खेमे की प्रतिक्रिया
शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि किसी भी कथित अलग गुट या विलय के दावे को मान्यता न दी जाए। उनका कहना है कि पार्टी की वैधानिक स्थिति से जुड़े मुद्दे अभी न्यायिक प्रक्रिया में हैं।
वहीं संजय राउत ने आरोप लगाया है कि सांसदों को पक्ष बदलने के लिए करोड़ों रुपये का प्रलोभन दिया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर असर
यदि छह सांसद अलग गुट बनाने में सफल होते हैं, तो लोकसभा में शिवसेना (UBT) की ताकत काफी कम हो जाएगी और एकनाथ शिंदे गुट तथा NDA को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है। यह 2022 में विधायकों की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है।
आगे क्या?
सूत्रों के अनुसार 19 जून तक इन सांसदों के शिंदे गुट में औपचारिक रूप से शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष की प्रक्रिया और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
शिवसेना (UBT) में संभावित टूट महाराष्ट्र की राजनीति का नया टर्निंग पॉइंट बन सकती है। यदि यह घटनाक्रम पूरी तरह साकार होता है, तो राज्य की राजनीतिक समीकरणों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम और 19 जून के संभावित घटनाक्रम पर टिकी हैं।