
अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर मुंबई में हुई फायरिंग
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर मुंबई में हुई फायरिंग की घटना ने फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों को हैरान कर दिया है। 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में फुटबॉल खेलने के बाद लौट रहे टाइगर श्रॉफ की BMW कार को निशाना बनाकर गोलियां चलाई गईं। राहत की बात यह रही कि अभिनेता को गोली नहीं लगी और वह सुरक्षित बच गए। हालांकि, इस घटना में उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की खबर सामने आई। मामले में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तीन कथित हमलावरों को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया। वहीं, 20 अक्टूबर को हरियाणा के सोनीपत से समीर नाम के एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई है, जिस पर शूटरों का संपर्क कथित गैंगस्टर अनिल पंडित से कराने का आरोप है।
कब और कहां हुई टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग?
रिपोर्टों के मुताबिक, 18 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7 बजे मुंबई के जुहू इलाके में पुष्पा नरसी पार्क के पास यह घटना हुई। टाइगर श्रॉफ फुटबॉल खेलने के बाद अपनी कार से लौट रहे थे। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर आए तीन लोगों में से दो ने उनकी कार पर फायरिंग की, जबकि तीसरा व्यक्ति मोटरसाइकिल पर भागने के लिए तैयार था।
प्रारंभिक रिपोर्टों में तीन राउंड फायरिंग की जानकारी दी गई, जबकि बाद की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में घटनास्थल से पांच खाली कारतूस मिलने का उल्लेख है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कार पर गोली लगने के निशान और बरामद सबूतों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
क्या टाइगर श्रॉफ को गोली लगी?
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की खबरें सामने आईं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार टाइगर श्रॉफ को गोली नहीं लगी थी। वह सुरक्षित बच गए। उनकी कार पर गोलियां चलाई गईं और टूटे शीशे या गोलीबारी से जुड़े मलबे के कारण उन्हें मामूली चोट लगने की भी खबरें आईं।
रिपोर्टों के मुताबिक, उनके ड्राइवर फिरदौस इब्राहिम बलूच के बाएं हाथ में गोली लगी। एक अन्य व्यक्ति, जिसकी पहचान कुछ रिपोर्टों में व्लॉगर उमेश चौहान के रूप में बताई गई है, भी घायल हुआ। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में जांच तेज कर दी और आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें लगाईं।
पुलिस ने तीन आरोपियों को कोटा से कैसे पकड़ा?
फायरिंग के बाद आरोपी मोटरसाइकिल से फरार हुए। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन की गतिविधियों और उनके भागने के रास्ते की जानकारी जुटाई। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों ने अंधेरी इलाके में मोटरसाइकिल छोड़ दी और फिर लोकल ट्रेन तथा टैक्सी की मदद से मुंबई से बाहर निकलने की कोशिश की।
बताया गया कि वे सूरत पहुंचे और वहां से पुणे-जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हुए। पुलिस को उनके ट्रेन में होने की जानकारी मिली, जिसके बाद राजस्थान पुलिस और अन्य संबंधित टीमों ने कोटा रेलवे स्टेशन पर कार्रवाई की। तीनों को 19 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया। पुलिस की जांच में उनकी कथित फरारी की योजना और संपर्कों से जुड़े कई अहम सुराग सामने आए।
कौन हैं गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी?
मीडिया रिपोर्टों में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों की पहचान रेहान अंसारी, फूल सिंह और ऋतिक कुमार उर्फ रोशन के रूप में बताई गई है। रेहान और फूल सिंह हरियाणा के सोनीपत क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं, जबकि ऋतिक कुमार मूल रूप से बिहार के बेगूसराय का रहने वाला बताया गया है और मुंबई में बाइक-टैक्सी का काम करता था।
रेहान के बारे में रिपोर्टों में बताया गया है कि उसने नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और वेल्डिंग का काम सीख रहा था। उसके खिलाफ पहले भी आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज होने और जमानत पर बाहर होने की खबर है। फूल सिंह के बारे में भी पुराने मामले से जुड़े दावे सामने आए हैं। इन आरोपियों की भूमिका और कथित आपराधिक नेटवर्क से उनके संबंधों की जांच जारी है। आरोप साबित होना अभी बाकी है।
चौथा आरोपी समीर कौन है और उसकी क्या भूमिका बताई जा रही है?
20 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, हरियाणा के सोनीपत से समीर नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उसने फायरिंग में शामिल लोगों का संपर्क अनिल पंडित से कराने में भूमिका निभाई थी। इस गिरफ्तारी के बाद मामले में हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या छह बताई गई है, हालांकि सभी की भूमिका और आरोपों की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित साजिश किसने तैयार की, शूटरों को किसने निर्देश दिए और वारदात के लिए आर्थिक मदद किसने उपलब्ध कराई। समीर की भूमिका को लेकर भी पुलिस जांच और पूछताछ के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।
अनिल पंडित का नाम क्यों सामने आया?
इस मामले में कथित गैंगस्टर अनिल पंडित का नाम भी चर्चा में आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसने और हरमन संधू नाम के व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। रिपोर्टों में अनिल पंडित को लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क से जुड़ा बताया गया है।
कथित सोशल मीडिया संदेशों में टाइगर श्रॉफ को अभिनेता सलमान खान के साथ काम करने को लेकर निशाना बनाने की बात कही गई। हालांकि, पुलिस इन दावों की प्रामाणिकता और हमले के वास्तविक मकसद की जांच कर रही है। किसी गैंग की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसी ने घटना को अंजाम दिया था।
क्या पहले भी टाइगर श्रॉफ की रेकी की गई थी?
जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर फुटबॉल मैदान और अभिनेता की गतिविधियों पर पहले भी नजर रखी थी। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वे एक सप्ताह पहले भी वहां पहुंचे थे, लेकिन उस दिन टाइगर श्रॉफ के मैदान पर नहीं आने के कारण हमला नहीं हो सका।
पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है कि आरोपियों को अभिनेता की दिनचर्या की जानकारी किसने दी और क्या इस साजिश में अन्य लोग भी शामिल थे। सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल सबूतों के जरिए कथित रेकी तथा हमले के बीच संबंध स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
हमले के लिए पैसे और विदेश भेजने का लालच?
रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि उन्हें हमले के लिए पैसे और विदेश में बसाने का लालच दिया गया था। कुछ रिपोर्टों में ₹37,000 देने का वादा किए जाने की बात कही गई है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या आरोपियों को दिल्ली के रास्ते नेपाल भागने की योजना दी गई थी।
फिलहाल इन दावों को जांच का हिस्सा माना जाना चाहिए। पुलिस की आधिकारिक जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले सबूत ही यह स्पष्ट कर पाएंगे कि आरोपियों को किसने भर्ती किया, पैसे का लेन-देन कैसे हुआ और साजिश में किसकी क्या भूमिका थी।
महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई
घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार की ओर से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की जानकारी ली और पुलिस को जांच तेज करने के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी घटना की निंदा करते हुए सुरक्षा को लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
मुंबई पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, कथित तौर पर इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल, कारतूस और मोबाइल फोन से जुड़े सबूतों की जांच शुरू की। मामले में मुंबई और हरियाणा पुलिस के बीच समन्वय की खबरें भी सामने आई हैं।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में अब आगे क्या होगा?
फिलहाल जांच का मुख्य फोकस हमले की साजिश, आरोपियों के आपसी संपर्क, कथित गैंग कनेक्शन, हथियारों के स्रोत और आर्थिक लेन-देन पर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फायरिंग का आदेश किसने दिया और इस घटना के पीछे वास्तविक मकसद क्या था।
टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग की घटना में अभिनेता सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए। तीन कथित हमलावरों को कोटा से गिरफ्तार किया गया और बाद में समीर की गिरफ्तारी की खबर सामने आई। अनिल पंडित तथा कथित गैंग कनेक्शन की भूमिका की जांच जारी है। मामले में अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।