
सोमनाथ अमृत पर्व 2026: पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे, PM मोदी ने की विशेष पूजा
Somnath Temple में आज 11 मई 2026 को “सोमनाथ अमृत पर्व” का भव्य आयोजन हो रहा है। यह अवसर मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। वर्ष 1951 में इसी दिन भारत के प्रथम राष्ट्रपति Dr. Rajendra Prasad ने मंदिर के पुनर्निर्माण का लोकार्पण किया था। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
17 बार टूटकर भी अडिग रहा सोमनाथ
सोमनाथ मंदिर भारतीय सभ्यता, श्रद्धा और पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है। इतिहास में इस मंदिर को कई विदेशी आक्रमणों का सामना करना पड़ा। सबसे चर्चित हमला 1025-26 में Mahmud of Ghazni द्वारा किया गया था। इसके बाद भी मंदिर का पुनर्निर्माण बार-बार होता रहा। स्वतंत्रता के बाद Sardar Vallabhbhai Patel ने इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया और आधुनिक सोमनाथ मंदिर का निर्माण 1947 से 1951 के बीच पूरा हुआ।
आज के कार्यक्रम को “अमृत पर्व” के साथ-साथ “स्वाभिमान पर्व” के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि यह महमूद गजनवी के आक्रमण के लगभग 1000 वर्षों की ऐतिहासिक स्मृति से भी जुड़ा है।
ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है सोमनाथ
अरब सागर के तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार चंद्रदेव (सोम) ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी। इसी कारण भगवान शिव को यहां “सोमनाथ” यानी “सोम के स्वामी” कहा गया।
मान्यता है कि सबसे पहले चंद्रदेव ने सोने का मंदिर बनवाया, फिर Ravana ने चांदी का, और बाद में Krishna ने चंदन की लकड़ी से मंदिर का निर्माण कराया। प्रभास क्षेत्र वही स्थान माना जाता है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने देह त्यागी थी।
पीएम मोदी करेंगे विशेष पूजा और रोड शो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सोमनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर 11 पवित्र तीर्थों के जल से कुंभाभिषेक किया जाएगा। इसके अलावा महा रुद्र यज्ञ में लगभग 1.25 लाख आहुतियां दी जाएंगी।
कार्यक्रम में ध्वजारोहण, विशाल जनसभा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सूर्यकिरण एयर शो भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। पूरे प्रभास क्षेत्र को विशेष सजावट और रोशनी से सजाया गया है।
आस्था, संस्कृति और राष्ट्र गौरव का संदेश
सोमनाथ अमृत पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आत्मसम्मान और पुनर्जागरण का प्रतीक बन गया है। सदियों के संघर्ष के बाद भी सोमनाथ का अस्तित्व आज करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास और भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश देता है।