
भोजपुरी के “पावर स्टार” अब राजनीति के नए सितारे
भोजपुरी सिनेमा और संगीत जगत के सुपरस्टार पवन सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई नया गाना या फिल्म नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक वापसी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 5 जून 2026 को बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें सबसे चर्चित नाम पवन सिंह का रहा।
पार्टी की ओर से घोषित चार उम्मीदवारों में पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला प्रजापति शामिल हैं। 6 जून को नामांकन दाखिल करने के साथ ही उनका विधान परिषद पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है।
कौन हैं पवन सिंह?
पवन सिंह भोजपुरी फिल्म उद्योग के सबसे लोकप्रिय कलाकारों में गिने जाते हैं। “लॉलीपॉप लागेलू” जैसे सुपरहिट गानों ने उन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पहचान दिलाई। करोड़ों प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता इतनी अधिक है कि उन्हें भोजपुरी इंडस्ट्री का “पावर स्टार” कहा जाता है।
2024 में BJP से क्यों निकाले गए थे?
पवन सिंह का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने उन्हें पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि उन्होंने यह टिकट स्वीकार नहीं किया और बाद में बिहार की काराकाट सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
पार्टी नेतृत्व की अनुमति के बिना चुनाव मैदान में उतरने को अनुशासनहीनता माना गया। इसके बाद बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। काराकाट से चुनाव लड़ने के बावजूद उन्हें जीत नहीं मिली और वे चुनाव हार गए।
BJP में वापसी कैसे हुई?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2025 की शुरुआत में पवन सिंह ने दोबारा बीजेपी का दामन थाम लिया। पार्टी नेतृत्व और पवन सिंह के बीच कई दौर की बातचीत के बाद उनकी वापसी हुई। अब महज एक साल बाद ही पार्टी ने उन्हें विधान परिषद का उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी का यह कदम कई मायनों में अहम है।
पहला, पवन सिंह की भोजपुरी क्षेत्र में जबरदस्त लोकप्रियता है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और प्रवासी भोजपुरी समाज में उनका बड़ा प्रभाव माना जाता है।
दूसरा, पार्टी उन्हें एक बड़े जननेता के रूप में तैयार करने की रणनीति पर काम कर सकती है। MLC बनने के बाद भविष्य में उन्हें लोकसभा या राज्यसभा की राजनीति में भी बड़ी भूमिका मिल सकती है।
तीसरा, यह बीजेपी की “एंट्री-एग्जिट-एंट्री” राजनीति का दिलचस्प उदाहरण बन गया है। जिस नेता को अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से बाहर किया गया था, वही आज पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार बन चुका है।
क्या पवन सिंह ने विधानसभा चुनाव लड़ा था?
नहीं। पवन सिंह ने 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। उनका फोकस राष्ट्रीय राजनीति और उच्च सदन की राजनीति पर रहा। यही कारण है कि उन्हें विधानसभा सीट की बजाय विधान परिषद (MLC) का टिकट दिया गया है।
समर्थकों में खुशी की लहर
पवन सिंह को MLC उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उनके समर्थकों और भोजपुरी दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। समर्थकों का मानना है कि अब वे मनोरंजन जगत के साथ-साथ बिहार की राजनीति में भी बड़ी भूमिका निभाएंगे।
पवन सिंह का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 2024 में पार्टी से निष्कासन, निर्दलीय चुनाव लड़ना, हार का सामना करना, फिर बीजेपी में वापसी और अब विधान परिषद उम्मीदवार बनना उनकी राजनीतिक यात्रा का नया अध्याय है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भोजपुरी के “पावर स्टार” राजनीति के मंच पर कितनी बड़ी सफलता हासिल कर पाते हैं।