
पीएम मोदी की विदेश यात्रा से भारत को मिला निवेश और वैश्विक साझेदारी का बड़ा भरोसा
भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की 2026 की नीदरलैंड और यूएई यात्रा को भारत की वैश्विक रणनीति के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है। यह दौरा पांच देशों की यात्रा का हिस्सा है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी निवेश, रक्षा सहयोग और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया।
यूएई यात्रा में क्या हासिल हुआ?

United Arab Emirates की यात्रा के दौरान भारत और यूएई के बीच ऊर्जा, रक्षा, निवेश और टेक्नोलॉजी सेक्टर में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। यूएई ने भारत में लगभग 5 अरब डॉलर के निवेश पैकेज की घोषणा की, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा सुरक्षा पर भी दोनों देशों के बीच गहन चर्चा हुई। इसका उद्देश्य भारत की तेल और गैस आपूर्ति को अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाना है। यह यात्रा भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने वाली मानी जा रही है।
नीदरलैंड यात्रा की बड़ी उपलब्धियां

Netherlands में प्रधानमंत्री मोदी ने डच नेतृत्व के साथ व्यापार, ग्रीन टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और सेमीकंडक्टर निर्माण पर चर्चा की।
इस दौरान भारतीय समूह Tata Group और डच टेक कंपनी ASML के बीच सेमीकंडक्टर चिप टेक्नोलॉजी से जुड़ा महत्वपूर्ण समझौता हुआ। इसे भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा, भारत और यूरोप के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए भारत-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी चर्चा तेज हुई।
क्यों अहम माना जा रहा है यह दौरा?
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन चुनौतियों का सामना कर रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के लिए वैश्विक साझेदारियों पर तेजी से काम कर रहा है।
यूएई से ऊर्जा और निवेश सहयोग, जबकि नीदरलैंड से हाई-टेक और सेमीकंडक्टर सहयोग भारत की “विकसित भारत” रणनीति को गति देने वाला माना जा रहा है।