
उत्तर भारत में भीषण गर्मी और “लू” का कहर
उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में बने एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन, सूखी हवाओं और प्री-मानसून बारिश की कमी के कारण यह स्थिति बनी हुई है। लगातार तेज धूप और गर्म हवाओं ने हीट वेव को और खतरनाक बना दिया है। इसका असर स्वास्थ्य, कृषि और बिजली व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। अस्पतालों में हीट-स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़ रहे हैं, जबकि बिजली की रिकॉर्ड मांग से कई इलाकों में लोड-शेडिंग की समस्या भी सामने आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षों में ऐसी भीषण गर्मी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए लोगों को सावधानी बरतने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।
“लू” क्या होती है?
लू बेहद गर्म और शुष्क हवा होती है, जो दोपहर के समय मैदानों में तेज़ी से चलती है। यह शरीर का तापमान तेजी से बढ़ा देती है और हीट-स्ट्रोक का खतरा पैदा करती है। उत्तर भारत में सूखी मिट्टी, कम नमी और तेज धूप लू को और खतरनाक बना देते हैं।

बचाव के लिए क्या करें?
दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।ज्यादा पानी और ORS लें।हल्के रंग और ढीले कपड़े पहनें।बच्चों और बुज़ुर्गों को सीधे धूप से बचाकर रखें।बाहर काम करने वाले लोग सिर ढककर रखें और बीच-बीच में आराम करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हीट वेव और अधिक गंभीर हो सकती है, इसलिए शहरों और गांवों दोनों में गर्मी से बचाव की बेहतर तैयारी जरूरी होगी।