
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
नई दिल्ली/जींद | 19 जुलाई 2026
भारतीय रेलवे ने हरित परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल-सेल पैसेंजर ट्रेन को सेवा में शामिल कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस अत्याधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर राष्ट्र को समर्पित किया। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच लगभग 90 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर चलेगी और फिलहाल 14 स्टेशनों पर ठहरेगी। आम यात्रियों के लिए अधिकतम किराया केवल ₹25 रखा गया है, ताकि पर्यावरण-अनुकूल परिवहन का लाभ सभी तक पहुंच सके।
हाइड्रोजन ट्रेन कैसे करती है काम?
यह ट्रेन डीजल या बाहरी बिजली पर निर्भर नहीं है। इसमें लगी हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक हाइड्रोजन गैस और हवा में मौजूद ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली पैदा करती है। यही बिजली ट्रैक्शन मोटरों को चलाती है और ट्रेन आगे बढ़ती है। इस पूरी प्रक्रिया में केवल पानी की भाप उत्सर्जित होती है, जिससे यह पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल और जीरो-एमिशन परिवहन का उदाहरण बन जाती है।
आधुनिक तकनीक से लैस
इस हाइड्रोजन ट्रेन में कुल 10 कोच हैं, जिनमें 2 पावर कार और 8 यात्री कोच शामिल हैं। प्रत्येक पावर कार लगभग 1,200 किलोवाट बिजली उत्पन्न करने में सक्षम है, यानी कुल 2,400 किलोवाट क्षमता के साथ ट्रेन को 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ट्रेन में PEM (Proton Exchange Membrane) फ्यूल सेल, लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी और हाई-प्रेशर हाइड्रोजन सिलेंडर लगाए गए हैं, जो सुरक्षित और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
जींद में बना देश का पहला हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन
इस परियोजना के तहत हरियाणा के जींद में देश का पहला रेलवे हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन विकसित किया गया है। यह स्टेशन लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन सुरक्षित रूप से स्टोर कर सकता है और ट्रेन की दोनों पावर कारों में एक साथ ईंधन भरने की क्षमता रखता है।
सुरक्षा के लिए स्टेशन और ट्रेन दोनों में हाइड्रोजन लीकेज सेंसर, ऑटोमैटिक शटडाउन सिस्टम और इमरजेंसी कट-ऑफ मैकेनिज्म जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं।
क्यों खास है यह ट्रेन?
डीजल इंजन वाली ट्रेनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन से कार्बन उत्सर्जन, धुआं और शोर प्रदूषण लगभग समाप्त हो जाता है। साथ ही यह उन रेल मार्गों पर भी चलाई जा सकती है जहां अभी तक ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन उपलब्ध नहीं है। शुरुआती लागत अधिक होने के बावजूद भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन के बड़े पैमाने पर उत्पादन से इसकी परिचालन लागत कम होने की उम्मीद है।
भारतीय रेलवे की यह पहल देश को स्वच्छ, टिकाऊ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन आधारित ट्रेनें भारत के रेल नेटवर्क में हरित ऊर्जा क्रांति का आधार बन सकती हैं।